क्या मेरा दर्द तुम समझोगे?
क्या मेरा दर्द तुम समझोगे? देखो वह लिटाकर अपने बच्चे को सूटकेस पर... खींच रही है कैसे । सैकड़ों मील कुछ हो ही न उसके लिए जैसे । कितना चलना है पता नहीं । कहां रुकना है पता नहीं । आखिरी बार कब खाया था याद नहीं । बस इतना याद है कि... चल रही हूं अपने रास्ते । अपनी जिंदगी के वास्ते । मरने का मुझे शौक नहीं है। भूखे पेट...मेरे लिए डाउन लौक नहीं है। चलूंगी नहीं तो मर जाऊंगी । क्या इन सुनसान रास्तों से डर जाउंगी? अब कुछ भी हो चलना है । कितने भी हो कठिन हालात आगे बढ़ना है । ... आशुतोष झा