क्या मेरा दर्द तुम समझोगे?

   क्या मेरा दर्द तुम समझोगे?

देखो वह लिटाकर अपने बच्चे को सूटकेस पर... खींच रही है कैसे ।
सैकड़ों मील कुछ हो ही न उसके लिए जैसे ।
कितना चलना है पता नहीं ।
कहां रुकना है पता नहीं  ।

आखिरी बार कब खाया था याद नहीं ।
बस इतना याद है कि...
 चल रही हूं अपने रास्ते ।
अपनी जिंदगी के वास्ते ।
मरने का मुझे शौक नहीं है।
भूखे पेट...मेरे लिए डाउन लौक नहीं है।
चलूंगी नहीं तो मर जाऊंगी ।
 क्या इन सुनसान रास्तों से डर जाउंगी?
 अब कुछ भी हो चलना है ।
कितने भी हो कठिन हालात आगे बढ़ना है ।

... आशुतोष झा

Comments

  1. अपने पूरे सामर्थ्य से मदद करें।
    सजग रहें।🙏✨

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