लोग क्या कहेंगे ...Log kya kahenge
लोग क्या कहेंगे
नजरें बचाकर करो यह कामनहीं तो लोग क्या कहेंगे
अपनी उत्कंठाएं छुपा के व्यक्त करना
हो गए बच्चे बड़े
बुद्धि से काम लेना
नहीं तो लोग क्या कहेंगे
धर्म के नाम पर दिया इतना कम चंदा
यहीं पड़ा रह जाएगा माल-धंधा
यही दान ही तो ऊपर जाएगा
आपको शोहरत दिलाएगा
सारे काम बनाएगा
थी जेब ढीली
थी हालत पतली
लेकिन नहीं दिया तो
लोग क्या कहेंगे
बच्चे को कुछ और है बनना
है पिता को पड़ोसी से लड़ना
हम किसी से कम हैं क्या
बच्चे को टाइट करेंगे
उसका टाइम राइट करेंगे
हम भी आदर्श पिता हैं
सबको यह पता है
यह तो हमें करना है
नहीं तो लोग क्या कहेंगे
हमसे भी ज्यादा कोई निर्धन है
हमारे पास ज़रा-सा धन है
हमारी ही कोई मदद कर दे
हम कैसे किसी की मदद करें
ऐसे थोड़े ही होता है
ऐसा करेंगे तो
लोग क्या कहेंगे...
बेटा बाएं हाथ से पैसा नहीं लेते-देते हैं
सूंघ कर धूप नहीं खरीदते हैंहर दिन दाढ़ी नहीं बनवाना
मूंछ तभी हटाते हैं
जब पिता गुज़र जाते हैं
मुर्दे को देख लिया
अब पड़ेगा नहाना
मंदिर के बाहर गाली तो चलता है
वहां कहां ईश्वर रहता है
यह तो सब करते हैं
हम नहीं करेंगे
तो लोग क्या कहेंगे
तुम्हारे हिम्मत कहां है
शराब सिगरेट तो मर्दों के निशां हैं
उस गली से मत चलो
नहीं तो पैसे मांग लेगा
मेरा बेटा नालायक है नालायक ही रहेगा
अब यह सब तो करना ही पड़ेगा
नहीं तो लोग क्या कहेंगे
त्योहार आया बाहर की दीवारें रंग लो
झक चमकदार कपड़ों में निकलो
भीतर भले ही पड़ा हो कूड़ा
पर बाहर हो सब साफ सुथरा
आखिर हमें भी तो समाज का ख्याल है
इन्हीं सब से तो समाज खुशहाल है
सब करते हैं हम भी करेंगे
नहीं तो लोग क्या कहेंगे
........................आशुतोष झा...................
हमेशा रहें अडिग। हमेशा रहें निडर।��✨
ReplyDeleteJo iss kavita me hai wo hakikat h
ReplyDeleteAwesome
Sahi kaha aapne. Utsahvardhan ke liye bahut bahut shukriya 💐
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