जीवन नहीं मरा करता है...

कुछ सपनों के बिखराने से
कुछ अपनों के खो जाने से
जीवन नहीं मरा करता है
 नए ज्वार की चाह रखता है।

पुष्पित पल्लव झड़ जाने से
नयन के आंसू बरसाने से
जीवन नहीं मरा करता है
नए ज्वार की चाह रखता है।


अंतस मांझी ना मिलने पर
बुझा दिया ना जलने पर
जीवन नहीं मरा करता है
नए ज्वार की चाह रखता है।

ग़म का आदि हो जाने पर
कुछ बर्बादी हो जाने पर
जीवन नहीं मरा करता है
नए ज्वार की चाह रखता है।

हार जीत के दिन हैं चार
ऊपर से संताप अपार।
इस तंगी में होठों पर
हर्ष पंक्ति बिछ जाने पर
हर क्षण जीवन जीता है
नए ज्वार की चाह रखता है।


... आशुतोष झा

Comments

  1. जीवन सतत प्रवाहमान है।जो इसके साथ बहा वही इसे जी पाया।वही इसे समझ पाया।

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  2. Wow bhot hi sundar kavita h
    Issme sachai h

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार।सादर धन्यवाद।🙏

      Delete

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