भय

न भाग किसी भय से पगले
की बनाया उसे तूने ही तो है
भला बाप भी बेटे से डरकर कभी भागा है।
ठठा रह न, गर कोई ठठा कर हंसे।
देखना हर अहले दम, तू न फंसे।

.................. आशुतोष झा

    

Comments

  1. एक कविता जो भय के तिलिस्म को समझने में मदद करती है।

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